कानपुर : दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार बम धमाके के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के कानपुर से डॉ. शाहीन और डॉ. आरिफ के सामने आने के बाद ATS, IB और पुलिस अधिकारी एक्टिवली जांच कर रहे हैं। वे शहर में रहने वाले कश्मीरी युवाओं और स्टूडेंट्स को वेरिफाई कर रहे हैं। इस बीच इंटेलिजेंस एजेंसियों को शुक्रवार देर रात जानकारी मिली कि IIT कानपुर से कश्मीरी मूल के दो PhD स्टूडेंट दिल्ली धमाकों से पहले से लापता हैं, जिससे हड़कंप मच गया।
सिक्योरिटी एजेंसी के अधिकारी स्टूडेंट्स के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए IIT कानपुर पहुंचे और उनके रिकॉर्ड की जांच की। स्टूडेंट्स सबसे ज़्यादा किससे बात करते थे, उनकी एक्टिविटीज़ कैसी थीं? और भी कई डेटा इकट्ठा किए गए हैं। इस मामले में IIT कानपुर के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. बृज भूषण ने कहा, “दोनों PhD स्टूडेंट एक ओपन सेमिनार के लिए छुट्टी पर गए थे। उनकी PhD भी पूरी हो गई है।”
उनका जाना एक प्रोसेस का हिस्सा है। अब वे नौकरी की तलाश भी शुरू करेंगे। जैसे देश भर के एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन से कश्मीरी स्टूडेंट्स का डेटा मांगा गया है, वैसे ही IIT कानपुर में पढ़ने वाले सभी कश्मीरी स्टूडेंट्स का रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
कानपुर में आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस के बड़े अधिकारियों ने कमर कस ली है। जहां सभी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन से कश्मीरी स्टूडेंट्स का डेटा मांगा गया है, वहीं शहर में मौजूद सभी कश्मीरी युवाओं की तलाश तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि उनका मकसद किसी भी युवा को परेशान करना नहीं है। बल्कि, सभी का वेरिफिकेशन करना जरूरी है ताकि पुलिस के पास पूरा रिकॉर्ड रहे।
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